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Friday, September 19, 2025

मुज़फ्फरनगर स्वस्थ नारी सशक्त परिवार के संकल्प के साथ दहेज न लेने-न देने की शपथ


 मुज़फ्फरनगर




मुज़फ्फरनगर में सेवा पखवाड़ा 2025 के तहत “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार” थीम पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी और जिला परिवीक्षा अधिकारी के निर्देशन में यह कार्यक्रम राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण मुज़फ्फरनगर परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों को दहेज न लेने और न देने की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर इकाई प्रबंधक ऋतु चौधरी ने कहा कि दहेज एक सामाजिक अभिशाप है, जो समाज को खोखला कर रहा है। उन्होंने बताया कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के अंतर्गत दहेज का अर्थ ऐसी किसी भी संपत्ति या मूल्यवान वस्तु से है, जिसे विवाह के समय, विवाह से पूर्व या विवाह के बाद किसी भी रूप में एक पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार को या उनके परिजनों द्वारा दिया या देने का करार किया जाता है। दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनन अपराध है, जिसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।कार्यक्रम के दौरान जेजे एक्ट 2015 पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें बच्चों की देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि यह कानून न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य की गारंटी भी देता है। दहेज जैसी कुप्रथा बच्चों और महिलाओं के जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए इसे रोकने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।इस मौके पर वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक पूजा नरूला, कार्यालय सहायक रजनी भास्कर, चाइल्ड हेल्प लाइन से जुड़े प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सचिन कुमार, भुवनेश्वर, सागर और बहुउद्देशीय स्टाफ अमित कुमार मौजूद रहे। इसके साथ ही महिला कांस्टेबल पूजा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे समाज में दहेज जैसी कुरीति के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।कार्यक्रम का माहौल सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता से भरा रहा। वक्ताओं ने बताया कि जब तक समाज में दहेज की प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, तब तक महिलाओं की वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में कदम अधूरे रहेंगे। दहेज केवल आर्थिक बोझ ही नहीं है, बल्कि यह मानसिक शोषण का भी कारण बनता है। इसी कुप्रथा की वजह से कई बार महिलाओं को घरेलू हिंसा और आत्महत्या जैसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।सेवा पखवाड़ा के तहत आयोजित यह कार्यक्रम नारी सशक्तिकरण और परिवार की एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इसमें भाग लेने वाले सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में न तो दहेज लेंगे और न देंगे। साथ ही यह भी तय किया कि वे अपने आसपास के लोगों को जागरूक करेंगे और इस कुरीति के खिलाफ सामूहिक रूप से अभियान चलाएंगे।

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