मुजफ्फरनगर सोरम में सर्वखाप महापंचायत संपन्न: सामाजिक एकजुटता, परंपराओं और विकास को नई दिशा देने का संकल्प - 24CrimeNews

Breaking

Post Top Ad

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Pages

Thursday, November 20, 2025

मुजफ्फरनगर सोरम में सर्वखाप महापंचायत संपन्न: सामाजिक एकजुटता, परंपराओं और विकास को नई दिशा देने का संकल्प




मुजफ्फरनगर बुढ़ाना। सर्वखाप महापंचायत मुख्यालय गांव सोरम में 16 नवम्बर से शुरू हुई तीन दिवसीय सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गई। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशपाल बालियान ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस महापंचायत में कई खापों के चौधरी, थाम्बेदारों के साथ विभिन्न राज्यों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। हालांकि कुछ खाप चौधरी आयोजन की विधिक प्रक्रिया और पूर्व चर्चा न होने से असंतोष में रहे और शामिल नहीं हुए, लेकिन सोरम गांव की ऐतिहासिक महत्ता और यहां की धरती के प्रति लोगों की आस्था ने उपस्थित लोगों की संख्या को बड़ा रूप दिया। सोरम प्राचीन काल से ही संत महात्माओं की भूमि माना जाता है, जहां बड़े सामाजिक निर्णय लिए जाते रहे हैं। यही कारण है कि इसे सिद्ध देवभूमि भी कहा जाता है। इस महापंचायत में आए मेहमानों के रहने से लेकर खाने तक की जिम्मेदारी सोरम गांव और बालियान खाप ने बखूबी निभाई और अतिथि देवो भव की परंपरा को पूर्ण सम्मान दिया। इस आयोजन में यह चर्चा जरूर रही कि बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत और सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान को अपेक्षित वर्चस्व दिखाना चाहिए था, जबकि मोर्चा मुख्यतः राकेश टिकैत ने संभाला। हालांकि उनका पारिवारिक संबंध और समान संगठनात्मक भूमिका इसे संतुलित भी करती है। महापंचायत में समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार हुआ, जिन पर आगे भी चर्चा चलती रहेगी। महापंचायत के समापन के बाद अब सभी खाप चौधरी और जिम्मेदार व्यक्तियों पर यह दायित्व आ गया है कि सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों को धरातल पर लागू किया जाए। कुछ निर्णय ऐसे हैं जिन पर सरकार और न्यायालय के सहयोग की आवश्यकता होगी, लेकिन कई निर्णय समाज की जागरूकता और संगठित प्रयासों से ही पूरे किए जा सकते हैं। सोरम गांव पहले से ही सामाजिक मूल्यों और अनुकरणीय परंपराओं का केंद्र रहा है। गांव के लोग इन परंपराओं को व्यवहार में उतारकर समाज को दिशा देते आए हैं। सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान के इसी गांव से होने के कारण उन पर यह अतिरिक्त जिम्मेदारी है कि वे सोरम को सामाजिक मूल्यों की मिसाल बनाए रखें और महापंचायत के निर्णयों को लागू कर अन्य खापों को भी प्रेरित करें। महापंचायत के बाद ग्रामीणों में उत्साह है कि वे गांव को और अधिक संगठित, प्रगतिशील और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में योगदान देंगे। उम्मीद है कि सोरम से उठे सकारात्मक कदम न केवल जिले, बल्कि वेस्टर्न यूपी और पूरे उत्तर भारत में एक उदाहरण बनकर सामाजिक बदलाव और विकास की नई राह दिखाएंगे।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Responsive Ads Here