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Sunday, July 27, 2025

नई दिल्ली/बांदा। बुंदेलखंड को नहीं चाहिए और छलावा — पीएम योजनाओं में बैंकों की मनमानी चरम पर, विकास ठप, अलग राज्य की मांग फिर तेज

बुंदेलखंड की पीड़ा अब चेतावनी में बदल रही है — शालिनी सिंह पटेल


जिला ब्यूरो चीफ संदीप दीक्षित 



नई दिल्ली/बांदा। "बुंदेलखंड अब और बर्दाश्त नहीं करेगा!"–ठीक यही संदेश लेकर जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष  उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने आज केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की। यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि बुंदेलखंड की दशकों से दबाई गई आवाज़ को सत्ता के दरवाज़े तक पहुंचाने की ठोस कोशिश थी।शालिनी सिंह पटेल ने मंत्री के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री की योजनाएं ज़मीन पर पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, पीएमईजीपी, स्वरोजगार जैसी योजनाएं सिर्फ विज्ञापन में चमक रही हैं, लेकिन बैंकों की मनमानी और सिस्टम की उदासीनता के कारण आम जनता को इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा।उन्होंने बताया कि जब भी कोई महिला, किसान या बेरोजगार युवक बैंक में लोन के लिए जाता है, तो या तो उसका आवेदन लिया ही नहीं जाता या महीनों तक टालमटोल किया जाता है। अधिकारी कहते हैं “ऊपर से आदेश नहीं है” या “आपको लोन नहीं मिलेगा।” इससे साफ है कि गरीबों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के लिए लाई गई योजनाएं महज़ कागज़ों की शोभा बनकर रह गई हैं।उन्होंने बुंदेलखंड की उपेक्षा का मुद्दा भी मुखर रूप से उठाया। कहा कि बुंदेलखंड को हमेशा चुनावी वादों में उलझाकर रखा गया, लेकिन न तो यहां उद्योग लगे, न ही रोज़गार आया, और न ही सिंचाई जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान हुआ। हर साल पलायन, बेरोज़गारी और किसान आत्महत्या जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।शालिनी सिंह पटेल ने मंत्री को दो टूक कहा कि बुंदेलखंड अब अलग राज्य की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेगा। यह केवल मांग नहीं, बल्कि हक है, जो इस क्षेत्र की सामाजिक, भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए पूरी तरह जायज़ है।केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने सभी बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिया कि वे इन मुद्दों को प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं की ज़मीनी स्थिति की समीक्षा करवाई जाएगी और बैंकों की लापरवाही पर कार्रवाई होगी।लेकिन सवाल वही है—क्या सिर्फ सुनना काफ़ी है? बुंदेलखंड अब ठोस फैसले चाहता है। क्योंकि यह इलाका अब आश्वासन नहीं, अधिकार मांग रहा है।

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