सहारनपुर
सहारनपुर। सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की दबाव की राजनीति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नगर निगम प्रवर्तन दल और व्यापारी अशोक खुराना के बीच विवाद को मुद्दा बनाकर संगठन ने तीन बार धरना-प्रदर्शन किया और अधिकारियों से लेकर महापौर व भाजपा विधायकों तक पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन निगम जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज ने संगठन की हकीकत उजागर कर दी, जिसमें व्यापारी ही दोषी साबित हुआ।
करीब दो माह पूर्व निगम प्रवर्तन दल और व्यापारी के बीच हुई हाथापाई को लेकर संगठन ने बड़ा आंदोलन छेड़ा। महानगर अध्यक्ष विवेक मनोचा ने इसे अधिकारियों की मनमानी बताते हुए निगम पर ही आरोप लगाए। यहां तक कि महापौर और भाजपा विधायकों पर भी दबाव बनाया गया। लेकिन जब जांच रिपोर्ट सामने आई तो खुलासा हुआ कि धक्का-मुक्की की शुरुआत व्यापारी ने ही की थी और प्रवर्तन दल पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन निकले।
बावजूद इसके, उद्योग व्यापार मंडल ने तीन बार धरना-प्रदर्शन कर निगम के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार विवेक मनोचा भाजपा विधायकों और महापौर से भी कई बार टकराव की स्थिति तक पहुंच गए। चूंकि व्यापारी वर्ग को भाजपा का बड़ा समर्थक माना जाता है, इसलिए जनप्रतिनिधियों ने नरम रुख अपनाना ही उचित समझा।
इधर, जीआईएस सर्वे और टैक्स विवाद को लेकर भी संगठन लगातार सड़क पर उतरा। आरोप है कि कुछ चुनिंदा व्यापारियों का टैक्स कम कराने और सर्वे में गड़बड़ी दबाने के लिए संगठन ने दबाव बनाया। रायवाला क्षेत्र में नालों की सफाई और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी संगठन के विरोध के कारण रुक गई, जिसका परिणाम हालिया बारिश में बाजारों में जलभराव के रूप में सामने आया।
शहर के जानकारों का कहना है कि विवेक मनोचा नगर निगम से लेकर भाजपा नेताओं और जिला प्रशासन तक पर दबाव की राजनीति करते हैं। हालांकि जांच रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि संगठन का पक्ष हर बार सही नहीं होता। लगातार दबाव की राजनीति से संगठन ने व्यापारियों में अपनी मजबूत छवि तो बनाई, मगर जब सच्चाई उजागर हुई तो संगठन को बार-बार “मुंह की खानी” पड़ी।
इसी कड़ी में अब 20 अगस्त को सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने काला झंडा और काली पट्टी बांधकर विरोध करने की घोषणा की है। सवाल यह है कि क्या इस तरह के आंदोलन से व्यापारियों की वास्तविक समस्याओं का समाधान होगा या फिर यह केवल नेताओं और अधिकारियों पर दबाव बनाने की राजनीति का हिस्सा है।
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