जिला ब्यूरो चीफ संदीप दीक्षित
बांदा कलेक्ट्रेट सभागार में गौ सेवा आयोग की जनपद स्तरीय अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने की, जिसमें आयोग के सदस्य राजेश सिंह सेंगर, विधायक ओममणि वर्मा और एमएलसी जितेन्द्र सिंह सेंगर विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस बैठक में गौवंश संरक्षण और मुख्यमंत्री गौ-सहभागिता योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री गौ-सहभागिता योजना के अंतर्गत यदि कोई किसान या व्यक्ति एक गौवंश का संरक्षण करता है तो उसे प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि बुन्देलखण्ड के बांदा जिले को गौ संरक्षण का एक मॉडल जनपद विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाकर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने और वहां केयरटेकर के साथ पाराबिट तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती से न केवल पैदावार बढ़ेगी बल्कि किसानों की आय भी दोगुनी होगी। उन्होंने किसानों और गौशाला संचालकों से अपील की कि वे गोबर और मूत्र का उपयोग खेती में करें तथा बायोगैस उत्पादन की दिशा में भी काम करें। बैठक में यह भी तय किया गया कि गोचर भूमि पर हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और मनरेगा के तहत कैटल यूनिट शेड का निर्माण कराया जाए। गौशाला संचालकों से अपेक्षा की गई कि वे एक एकड़ भूमि में हरे चारे का उत्पादन करें ताकि गौवंशों को पर्याप्त आहार मिल सके। गुप्ता ने इस कार्य को मिशनरी रूप में करने का आह्वान किया और कहा कि हर किसान कम से कम एक गाय अवश्य पाले। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में गौवंश सड़कों पर विचरण न करें बल्कि उन्हें गौशालाओं में सुरक्षित रखा जाए। गौ सेवा आयोग के सदस्य राजेश सिंह सेंगर ने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में 310 गौशालाएं संचालित हैं। इनमें गौवंशों को सुरक्षित रखने के साथ नर, मादा और बछड़ों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने चिकित्सीय सुविधाएं, पानी, भूसा और हरे चारे की आपूर्ति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक दूध देने वाली नस्लों का संवर्धन किया जाए ताकि लोग गौवंशों को निराश्रित छोड़ने की बजाय उन्हें आय का साधन समझें। सेंगर ने ब्लॉक स्तरीय अनुश्रवण समिति में ब्लॉक प्रमुखों को भी शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने मटौंध की गौशालाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गौवंश संरक्षण की संवेदनशीलता देखने लायक है और इस मॉडल को जिले की अन्य गौशालाओं में भी लागू किया जाना चाहिए। विधायक ओममणि वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री गौ-सहभागिता योजना को लेकर लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। साथ ही ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए जो निराश्रित गौवंशों को सड़कों पर छोड़ते हैं। एमएलसी जितेन्द्र सिंह सेंगर ने सुझाव दिया कि सभी गौवंशों की ईयर जियो टैगिंग की जाए ताकि उनकी सही मॉनिटरिंग हो सके और वे संरक्षित रह सकें। बैठक में जिलाधिकारी जे. रीभा ने आश्वासन दिया कि जिले के सभी गौवंशों को शीघ्र ही गौशालाओं में सुरक्षित किया जाएगा और ईयर टैगिंग करते हुए उनका पूरा रजिस्टर बनाया जाएगा। गौवंशों की सुरक्षा और देखभाल के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी। बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष बबेरू विवेकानंद, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष वंदना गुप्ता, मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी न्यायिक माया शंकर, अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज सहित जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी, गौपालक और पशु चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में जिले को गौ संरक्षण का आदर्श मॉडल बनाने का संकल्प लिया।
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