प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मंगलवार को हुई मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ विवाद गहराता जा रहा है और भारत भी इसकी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सीमा विवाद, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। वांग यी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी अलग बैठक की, जिसमें विशेष रूप से सीमा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत-चीन रिश्ते बीते कुछ वर्षों से तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं, खासकर लद्दाख सीमा पर हुए संघर्ष के बाद। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के आपसी भरोसे और आर्थिक प्रगति के लिए अनिवार्य है। वहीं, वांग यी ने भी यह संकेत दिया कि चीन भारत के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए संवाद को सर्वोच्च महत्व देता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सभ्यताओं का साझा इतिहास और विकास की समान आकांक्षाएं सहयोग का मजबूत आधार बन सकती हैं।
बैठक में आर्थिक सहयोग का मुद्दा भी अहम रहा। चीन ने भारत को भरोसा दिलाया कि टैरिफ विवाद और वैश्विक आर्थिक दबावों के बावजूद वह भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में बढ़ते निवेश के अवसरों और “मेक इन इंडिया” पहल के तहत सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक साझेदारी न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र की स्थिरता और विकास के लिए जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वांग यी की बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाए रखने और संचार तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा हुई। भारत ने दोहराया कि सीमा पर किसी भी प्रकार की उकसाने वाली गतिविधि से विश्वास बहाली की प्रक्रिया प्रभावित होती है। चीन ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि दोनों पक्षों को आपसी संवाद बढ़ाना चाहिए और विवादित क्षेत्रों में स्थिति को सामान्य करने के प्रयास करने चाहिए।
इस मुलाकात ने संकेत दिया है कि भारत और चीन अपने रिश्तों को स्थिरता की ओर ले जाने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाश रहे हैं। हालांकि, असली चुनौती यह होगी कि सीमा पर तनाव और वैश्विक व्यापारिक दबाव के बीच दोनों देश किस हद तक एक-दूसरे पर भरोसा कर पाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक आने वाले महीनों में भारत-चीन रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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