जिला ब्यूरो चीफ संदीप दीक्षित
बांदा। जिले में प्रशासनिक बदइंतजामी और विभागीय लापरवाही का ऐसा मंजर सामने आया है जिसने हज़ारों ग्रामीणों की ज़िंदगी संकट में डाल दी है। जल निगम और जल संस्थान की आपसी खींचतान ने बदौसा की 3000 और दुबरिया मौजा की 3500 आबादी को महीनों से पेयजल से वंचित कर रखा है। बदौसा में जल संस्थान की टंकी से सप्लाई ठप है। ग्रामीणों को दैनिक उपयोग के लिए एक किलोमीटर दूर जाकर हैंडपंप से पानी भरना पड़ता है। दुबरिया मौजा के हालात और भी बदतर हैं। यहाँ 3500 की आबादी नदी के दूषित पानी और हैंडपंपों पर निर्भर है।
गांव के आशीष कुमार, रफीक खान, संदीप, आरके बाबू, शेख असद, फहीम, आशा, हीरामणि, रेखा, बबीता, सफीला, मारिया, हेमलता समेत दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि पीने योग्य पानी की भारी किल्लत है। कई बार हैंडपंप भी जवाब दे जाते हैं। महिलाएँ और बुजुर्ग रोज़मर्रा का पानी ‘ढो–ढोकर’ थक चुके हैं। स्वच्छ पानी न मिलने से लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। गर्मी के मौसम में समस्या विकराल रूप ले लेती है। बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक़्क़तें झेलनी पड़ रही हैं। ग्राम प्रधान अजीजुल हक़ ने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से समस्या बताई, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ नतीजा यह है कि ग्रामीणों को दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जल संस्थान के जेई मयंक सोनकर का कहना है कि बदौसा और दुबरिया की पेयजल व्यवस्था जल निगम को सौंप दी गई है। वहीं जल निगम के एई अंकित वर्मा का दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत कार्य चल रहा है, लेकिन उन्हें अभी तक जल संस्थान ने लिखित में कोई ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी है। इस खींचतान ने ग्रामीणों को जल संकट के नरक में धकेल दिया है। क्या विभागों की यह रस्साकशी ग्रामीणों की जान से खेल रही है ? क्या डीएम का आदेश भी इन बेख़ौफ़ अफ़सरों पर असर डालेगा या फिर लोग दूषित पानी पीकर बीमारियों से जूझते रहेंगे ? ग्रामीणों का कहना है कि अगर पेयजल व्यवस्था तुरंत दुरुस्त नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
.jpeg)

No comments:
Post a Comment