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Friday, September 19, 2025

मुजफ्फरनगर में अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़, करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश


 


मुजफ्फरनगर। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को TRAI, ईडी, सीबीआई और न्यायालय का अधिकारी बताकर भोले–भाले लोगों से ठगी करता था। पुलिस ने गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में सिमकार्ड, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चैकबुक, एक स्कूटी और 99,500 रुपये नकद बरामद किए हैं। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान देहरादून निवासी निखिल गोयल और छत्तीसगढ़ निवासी हरप्रीत सिंह उर्फ हर्ष के रूप में हुई है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना राजू, जो भिलाई का रहने वाला है, अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। यह लोग सबसे पहले किसी व्यक्ति को फोन कर अपने आपको सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। फर्जी दस्तावेज दिखाकर उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके बैंक खाते से अवैध लेन–देन हुआ है। इसके बाद “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लाकर उनसे लाखों रुपये ठग लिए जाते थे। हाल ही में इस गिरोह ने लोक निर्माण विभाग के एक रिटायर्ड इंजीनियर को निशाना बनाया था और 33.33 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। डर के माहौल में इंजीनियर ने अपने लाखों रुपये आरोपियों के बताए खातों में जमा करा दिए।पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि यह गिरोह लोगों से बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिमकार्ड हासिल करता था और फिर विदेश बैठे साइबर अपराधियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करता था। ठगी से कमाए गए पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जाता था, ताकि पैसों का कोई सुराग न मिल सके। पुलिस जांच में अब तक 46.55 करोड़ रुपये की ठगी से संबंधित 44 अलग–अलग शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह शिकायतें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत कई राज्यों से जुड़ी हुई हैं, जिससे साफ है कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित था।वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस लगातार इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और फरार आरोपी राजू की तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के साइबर अपराधों से बचने के लिए जनता को जागरूक रहना बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें और अगर कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” जैसी धमकी देता है, तो उसकी बातों में न आएं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।यह घटना न सिर्फ साइबर अपराधियों की चालाकियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस तरह आम नागरिकों को डर और दबाव का शिकार बनाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। पुलिस का कहना है कि समय–समय पर जागरूकता अभियान चलाकर ऐसे मामलों से लोगों को सावधान करना ही ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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